श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.32

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

इत्यनुक्रोशहृदयो भगवानाह तान् शिवः।

बद्धाञ्जलीन् राजपुत्रान्‍नारायणपरो वचः॥ ३२

ityanukrośahṛdayo bhagavānāha tān śivaḥ|

baddhāñjalīn rājaputrānnārāyaṇaparo vacaḥ|| 32

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—तब नारायणपरायण करुणार्द्रहृदय भगवान् शिवने अपने सामने हाथ जोड़े खड़े हुए उन राजपुत्रोंको यह स्तोत्र सुनाया॥ ३२॥

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