तत् त्वं ब्रह्म परं ज्योतिराकाशमिव२ विस्तृतम्३॥ ६०
yatredaṃ vyajyate viśvaṃ viśvasminnavabhāti yat|
tat tvaṃ brahma paraṃ jyotirākāśamiva vistṛtam|| 60
अर्थ
जिसमें यह सारा जगत् दिखायी देता है और जो स्वयं सम्पूर्ण जगत्में भास रहा है, वह आकाशके समान विस्तृत और परम प्रकाशमय ब्रह्मतत्त्व आप ही हैं॥ ६०॥✎ 414
यत्रेदं व्यज्यते विश्वं विश्वस्मिन्नवभाति यत्।
तत् त्वं ब्रह्म परं ज्योतिराकाशमिव विस्तृतम्॥ ६०
जिसमें यह सारा जगत् दिखायी देता है और जो स्वयं सम्पूर्ण जगत्में भास रहा है, वह आकाशके समान विस्तृत और परम प्रकाशमय ब्रह्मतत्त्व आप ही हैं॥ ६०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.60 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 530) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/24/60/