श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.74

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अथेदं नित्यदा युक्तो जपन्‍नवहितः पुमान्।

अचिराच्छ्रेय आप्नोति वासुदेवपरायणः॥ ७४

athedaṃ nityadā yukto japannavahitaḥ pumān|

acirācchreya āpnoti vāsudevaparāyaṇaḥ|| 74

अर्थ

अब भी जो भगवत्परायण पुरुष इसका एकाग्र चित्तसे नित्यप्रति जप करेगा, उसका शीघ्र ही कल्याण हो जायगा॥ ७४॥

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