फिर तुम्हारी तरह उसने भी अनेक प्रकारके भोगोंकी कामनासे यज्ञकी दीक्षा ले तरह-तरहके पशुहिंसामय घोर यज्ञोंसे देवता, पितर और भूतपतियोंकी आराधना की॥ ११॥✎ 1340
ईजे च क्रतुभिर्घोरैर्दीक्षितः पशुमारकैः।
देवान् पितॄन् भूतपतीन्नानाकामो यथा भवान्॥ ११
फिर तुम्हारी तरह उसने भी अनेक प्रकारके भोगोंकी कामनासे यज्ञकी दीक्षा ले तरह-तरहके पशुहिंसामय घोर यज्ञोंसे देवता, पितर और भूतपतियोंकी आराधना की॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.27.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 544) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/27/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)