॥ श्रीहरिः ॥
चण्डवेग इति ख्यातो गन्धर्वाधिपतिर्नृप।
गन्धर्वास्तस्य बलिनः षष्ट्युत्तरशतत्रयम्॥ १३
caṇḍavega iti khyāto gandharvādhipatirnṛpa|
gandharvāstasya balinaḥ ṣaṣṭyuttaraśatatrayam|| 13
अर्थ
राजन्! चण्डवेग नामका एक गन्धर्वराज है। उसके अधीन तीन सौ साठ महाबलवान् गन्धर्व रहते हैं॥ १३॥
चण्डवेग इति ख्यातो गन्धर्वाधिपतिर्नृप।
गन्धर्वास्तस्य बलिनः षष्ट्युत्तरशतत्रयम्॥ १३
राजन्! चण्डवेग नामका एक गन्धर्वराज है। उसके अधीन तीन सौ साठ महाबलवान् गन्धर्व रहते हैं॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.27.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 544) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/27/13/