प्रज्वारोऽयं मम भ्राता त्वं च मे भगिनी भव।
चराम्युभाभ्यां लोकेऽस्मिन्नव्यक्तो भीमसैनिकः॥ ३०
यह प्रज्वार नामका मेरा भाई है और तू मेरी बहिन बन जा। तुम दोनोंके साथ मैं अव्यक्त गतिसे भयंकर सेना लेकर सारे लोकोंमें विचरूँगा’॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.27.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 545) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/27/30/