फिर पांचालराज पुरंजनने पितृवंशकी वृद्धि करनेवाले पुत्रोंका वधुओंके साथ और कन्याओंका उनके योग्य वरोंके साथ विवाह कर दिया॥ ८॥
स पंचालपतिः पुत्रान् पितृवंशविवर्धनान्।
दारैः संयोजयामास दुहितॄः सदृशैर्वरैः॥ ८
फिर पांचालराज पुरंजनने पितृवंशकी वृद्धि करनेवाले पुत्रोंका वधुओंके साथ और कन्याओंका उनके योग्य वरोंके साथ विवाह कर दिया॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.27.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 543) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/27/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1037 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): दुहितृ: → दुहितॄः