श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.28.30

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

तस्यां स जनयांचक्र आत्मजामसितेक्षणाम्।

यवीयसः सप्त सुतान् सप्त द्रविडभूभृतः॥ ३०

tasyāṃ sa janayāṃcakra ātmajāmasitekṣaṇām|

yavīyasaḥ sapta sutān sapta draviḍabhūbhṛtaḥ|| 30

अर्थ

उससे महाराज मलयध्वजने एक श्यामलोचना कन्या और उससे छोटे सात पुत्र उत्पन्‍न किये, जो आगे चलकर द्रविडदेशके सात राजा हुए॥ ३०॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें