ब्राह्मणने कहा—तू कौन है? किसकी पुत्री है? और जिसके लिये तू शोक कर रही है, वह यह सोया हुआ पुरुष कौन है? क्या तुम मुझे नहीं जानती? मैं वही तेरा मित्र हूँ, जिसके साथ तू पहले विचरा करती थी॥ ५२॥
का त्वं कस्यासि को वायं शयानो यस्य शोचसि।
जानासि किं सखायं मां येनाग्रे विचचर्थ ह॥ ५२
ब्राह्मणने कहा—तू कौन है? किसकी पुत्री है? और जिसके लिये तू शोक कर रही है, वह यह सोया हुआ पुरुष कौन है? क्या तुम मुझे नहीं जानती? मैं वही तेरा मित्र हूँ, जिसके साथ तू पहले विचरा करती थी॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 551) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/28/52/