॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.28.56
पंचारामं नवद्वारमेकपालं त्रिकोष्ठकम्।
षट्कुलं पंचविपणं पंचप्रकृति स्त्रीधवम्॥ ५६
paṃcārāmaṃ navadvāramekapālaṃ trikoṣṭhakam|
ṣaṭkulaṃ paṃcavipaṇaṃ paṃcaprakṛti strīdhavam|| 56
अर्थ
उसमें पाँच बगीचे, नौ दरवाजे, एक द्वारपाल, तीन परकोटे, छः वैश्यकुल और पाँच बाजार थे। वह पाँच उपादान-कारणोंसे बना हुआ था और उसकी स्वामिनी एक स्त्री थी॥ ५६॥