श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.28.65

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

बर्हिष्मन्‍नेतदध्यात्मं पारोक्ष्येण प्रदर्शितम्।

यत्परोक्षप्रियो देवो भगवान् विश्‍वभावनः॥ ६५

barhiṣmannetadadhyātmaṃ pārokṣyeṇa pradarśitam|

yatparokṣapriyo devo bhagavān viśvabhāvanaḥ|| 65

अर्थ

प्राचीनबर्हि! मैंने तुम्हें परोक्षरूपसे यह आत्मज्ञानका दिग्दर्शन कराया है; क्योंकि जगत‍्कर्ता जगदीश्‍वरको परोक्ष वर्णन ही अधिक प्रिय है॥ ६५॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां चतुर्थस्कन्धे
पुरंजनोपाख्यानेऽष्टाविंशोऽध्यायः
॥ २८॥

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