वाणीका व्यापार आपण है और तरह-तरहका अन्न बहूदन है तथा दाहिना कान पितृहू और बायाँ कान देवहू कहा गया है॥ १२॥✎ 13431344
आपणो व्यवहारोऽत्र चित्रमन्धो बहूदनम्।
पितृहूर्दक्षिणः कर्ण उत्तरो देवहूः स्मृतः॥ १२
वाणीका व्यापार आपण है और तरह-तरहका अन्न बहूदन है तथा दाहिना कान पितृहू और बायाँ कान देवहू कहा गया है॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.29.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 554) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/29/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1343 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति → निऋर्ऋति
#1344 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति → निर्ऋति