॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.29.64
नानुभूतं क्व चानेन देहेनादृष्टमश्रुतम्।
कदाचिदुपलभ्येत यद्रूपं यादृगात्मनि॥ ६४
nānubhūtaṃ kva cānena dehenādṛṣṭamaśrutam|
kadācidupalabhyeta yadrūpaṃ yādṛgātmani|| 64
अर्थ
कभी-कभी देखा जाता है कि जिस वस्तुका इस शरीरसे कभी अनुभव नहीं किया—जिसे न कभी देखा, न सुना ही—उसका स्वप्नमें, वह जैसी होती है, वैसा ही अनुभव हो जाता है॥ ६४॥