श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.30.42

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

नमः समाय शुद्धाय पुरुषाय पराय च।

वासुदेवाय सत्त्वाय तुभ्यं भगवते नमः॥ ४२

namaḥ samāya śuddhāya puruṣāya parāya ca|

vāsudevāya sattvāya tubhyaṃ bhagavate namaḥ|| 42

अर्थ

आप सर्वत्र समान शुद्ध स्वरूप और परम पुरुष हैं। आप सत्त्वमूर्ति भगवान् वासुदेवको हम नमस्कार करते हैं॥ ४२॥

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