॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.6.15
चूतैः कदम्बैर्नीपैश्च नागपुन्नागचम्पकैः।
पाटलाशोकबकुलैः कुन्दैः कुरबकैरपि॥ १५
cūtaiḥ kadambairnīpaiśca nāgapunnāgacampakaiḥ|
pāṭalāśokabakulaiḥ kundaiḥ kurabakairapi|| 15
अर्थ
आम, कदम्ब, नीप, नाग, पुन्नाग, चम्पा, गुलाब, अशोक, मौलसिरी, कुन्द, कुरबक, सुनहरे शतपत्र कमल, इलायची और मालतीकी मनोहर लताएँ तथा कुब्जक, मोगरा और माधवीकी बेलें भी उसकी शोभा बढ़ाती हैं॥ १५-१६॥✎ 1318