॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.6.18
खर्जूराम्रातकाम्राद्यैः प्रियालमधुकेंगुदैः।
द्रुमजातिभिरन्यैश्च राजितं वेणुकीचकैः॥ १८
kharjūrāmrātakāmrādyaiḥ priyālamadhukeṃgudaiḥ|
drumajātibhiranyaiśca rājitaṃ veṇukīcakaiḥ|| 18
अर्थ
कटहल, गूलर, पीपल, पाकर, बड़, गूगल, भोजवृक्ष, ओषध जातिके पेड़ (केले आदि, जो फल आनेके बाद काट दिये जाते हैं), सुपारी, राजपूग, जामुन, खजूर, आमड़ा, आम, पियाल, महुआ और लिसौड़ा आदि विभिन्न प्रकारके वृक्षों तथा पोले और ठोस बाँसके झुरमुटोंसे वह पर्वत बड़ा ही मनोहर मालूम होता है॥ १७-१८॥✎ 1318