श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.6.33

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तस्मिन्महायोगमये मुमुक्षुशरणे सुराः।

ददृशुः शिवमासीनं त्यक्तामर्षमिवान्तकम्॥ ३३

tasminmahāyogamaye mumukṣuśaraṇe surāḥ|

dadṛśuḥ śivamāsīnaṃ tyaktāmarṣamivāntakam|| 33

अर्थ

उस महायोगमय और मुमुक्षुओंके आश्रयभूत वृक्षके नीचे देवताओंने भगवान् शंकरको विराजमान देखा। वे साक्षात् क्रोधहीन कालके समान जान पड़ते थे॥ ३३॥

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