॥ श्रीहरिः ॥
तदा वृषध्वजद्वेषकलिलात्मा प्रजापतिः।
शिवावलोकादभवच्छरद्ध्रद इवामलः॥ १०
tadā vṛṣadhvajadveṣakalilātmā prajāpatiḥ|
śivāvalokādabhavaccharaddhrada ivāmalaḥ|| 10
अर्थ
दक्षका शंकरद्रोहकी कालिमासे कलुषित हृदय उनका दर्शन करनेसे शरत्कालीन सरोवरके समान स्वच्छ हो गया॥ १०॥
तदा वृषध्वजद्वेषकलिलात्मा प्रजापतिः।
शिवावलोकादभवच्छरद्ध्रद इवामलः॥ १०
दक्षका शंकरद्रोहकी कालिमासे कलुषित हृदय उनका दर्शन करनेसे शरत्कालीन सरोवरके समान स्वच्छ हो गया॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.7.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 434) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/7/10/