श्रीमहादेवजीने कहा—‘प्रजापते! भगवान्की मायासे मोहित हुए दक्ष-जैसे नासमझोंके अपराधकी न तो मैं चर्चा करता हूँ और न याद ही। मैंने तो केवल सावधान करनेके लिये ही उन्हें थोड़ा-सा दण्ड दे दिया॥ २॥✎ 361
नाघं प्रजेश बालानां वर्णये नानुचिन्तये।
देवमायाभिभूतानां दण्डस्तत्र धृतो मया॥ २
श्रीमहादेवजीने कहा—‘प्रजापते! भगवान्की मायासे मोहित हुए दक्ष-जैसे नासमझोंके अपराधकी न तो मैं चर्चा करता हूँ और न याद ही। मैंने तो केवल सावधान करनेके लिये ही उन्हें थोड़ा-सा दण्ड दे दिया॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.7.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 434) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/7/2/