श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.7.6

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

तदा सर्वाणि भूतानि श्रुत्वा मीढुष्टमोदितम्।

परितुष्टात्मभिस्तात साधु साध्वित्यथाब्रुवन्॥ ६

tadā sarvāṇi bhūtāni śrutvā mīḍhuṣṭamoditam|

parituṣṭātmabhistāta sādhu sādhvityathābruvan|| 6

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—वत्स विदुर! तब भगवान् शंकरके वचन सुनकर सब लोग प्रसन्‍न चित्तसे ‘धन्य! धन्य!’ कहने लगे॥ ६॥

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