श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.35

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

ध्रुव उवाच

सोऽयं शमो भगवता सुखदुःखहतात्मनाम्।

दर्शितः कृपया पुंसां दुर्दर्शोऽस्मद्विधैस्तु यः॥ ३५

so'yaṃ śamo bhagavatā sukhaduḥkhahatātmanām|

darśitaḥ kṛpayā puṃsāṃ durdarśo'smadvidhaistu yaḥ|| 35

अर्थ

ध्रुवने कहा—भगवन्! सुख-दुःखसे जिनका चित्त चंचल हो जाता है, उन लोगोंके लिये आपने कृपा करके शान्तिका यह बहुत अच्छा उपाय बतलाया। परन्तु मुझ-जैसे अज्ञानियोंकी दृष्टि यहाँतक नहीं पहुँच पाती॥ ३५॥

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