श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.6

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

अथातः कीर्तये वंशं पुण्यकीर्तेः कुरूद्वह।

स्वायम्भुवस्यापि मनोर्हरेरंशांशजन्मनः॥ ६

athātaḥ kīrtaye vaṃśaṃ puṇyakīrteḥ kurūdvaha|

svāyambhuvasyāpi manorhareraṃśāṃśajanmanaḥ|| 6

अर्थ

कुरुनन्दन! अब मैं श्रीहरिके अंश (ब्रह्माजी)-के अंशसे उत्पन्‍न हुए पवित्रकीर्ति महाराज स्वायम्भुव मनुके पुत्रोंके वंशका वर्णन करता हूँ॥ ६॥✎ 1321 1322

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1321 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति → निऋर्ऋति
  • #1322 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति → निर्ऋति

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