॥ श्रीहरिः ॥
द्वितीयं च तथा मासं षष्ठे षष्ठेऽर्भको दिने।
तृणपर्णादिभिः शीर्णैः कृतान्नोऽभ्यर्चयद्विभुम्॥ ७३
dvitīyaṃ ca tathā māsaṃ ṣaṣṭhe ṣaṣṭhe'rbhako dine|
tṛṇaparṇādibhiḥ śīrṇaiḥ kṛtānno'bhyarcayadvibhum|| 73
अर्थ
दूसरे महीनेमें उन्होंने छः-छः दिनके पीछे सूखे घास और पत्ते खाकर भगवान्का भजन किया॥ ७३॥✎ 372 1323
द्वितीयं च तथा मासं षष्ठे षष्ठेऽर्भको दिने।
तृणपर्णादिभिः शीर्णैः कृतान्नोऽभ्यर्चयद्विभुम्॥ ७३
दूसरे महीनेमें उन्होंने छः-छः दिनके पीछे सूखे घास और पत्ते खाकर भगवान्का भजन किया॥ ७३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.73 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 450) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/8/73/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
- #372 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की
- #1323 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पवित्रता-पूर्वक → पवित्रतापूर्वक