॥ श्रीहरिः ॥
पंचमे मास्यनुप्राप्ते जितश्वासो नृपात्मजः।
ध्यायन् ब्रह्म पदैकेन तस्थौ स्थाणुरिवाचलः॥ ७६
paṃcame māsyanuprāpte jitaśvāso nṛpātmajaḥ|
dhyāyan brahma padaikena tasthau sthāṇurivācalaḥ|| 76
अर्थ
पाँचवाँ मास लगनेपर राजकुमार ध्रुव श्वासको जीतकर परब्रह्मका चिन्तन करते हुए एक पैरसे खंभेके समान निश्चल भावसे खड़े हो गये॥ ७६॥
पंचमे मास्यनुप्राप्ते जितश्वासो नृपात्मजः।
ध्यायन् ब्रह्म पदैकेन तस्थौ स्थाणुरिवाचलः॥ ७६
पाँचवाँ मास लगनेपर राजकुमार ध्रुव श्वासको जीतकर परब्रह्मका चिन्तन करते हुए एक पैरसे खंभेके समान निश्चल भावसे खड़े हो गये॥ ७६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.76 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 451) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/8/76/