श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.18

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

अथाभिष्टुत एवं वै सत्संकल्पेन धीमता।

भृत्यानुरक्तो भगवान् प्रतिनन्द्येदमब्रवीत्॥ १८

athābhiṣṭuta evaṃ vai satsaṃkalpena dhīmatā|

bhṛtyānurakto bhagavān pratinandyedamabravīt|| 18

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! जब शुभ संकल्पवाले मतिमान् ध्रुवजीने इस प्रकार स्तुति की तब भक्तवत्सल भगवान् उनकी प्रशंसा करते हुए कहने लगे॥ १८॥

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