श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.24

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

इष्ट्वा मां यज्ञहृदयं यज्ञैः पुष्कलदक्षिणैः।

भुक्‍त्वा चेहाशिषः सत्या अन्ते मां संस्मरिष्यसि॥ २४

iṣṭvā māṃ yajñahṛdayaṃ yajñaiḥ puṣkaladakṣiṇaiḥ|

bhuktvā cehāśiṣaḥ satyā ante māṃ saṃsmariṣyasi|| 24

अर्थ

यज्ञ मेरी प्रिय मूर्ति है, तू अनेकों बड़ी-बड़ी दक्षिणाओंवाले यज्ञोंके द्वारा मेरा यजन करेगा तथा यहाँ उत्तम-उत्तम भोग भोगकर अन्तमें मेरा ही स्मरण करेगा॥ २४॥

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