श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.12.9

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

एवं निरुक्तं क्षितिशब्दवृत्त-

मसन्‍निधानात्परमाणवो ये।

अविद्यया मनसा कल्पितास्ते

येषां समूहेन कृतो विशेषः॥ ९

evaṃ niruktaṃ kṣitiśabdavṛtta-

masannidhānātparamāṇavo ye|

avidyayā manasā kalpitāste

yeṣāṃ samūhena kṛto viśeṣaḥ|| 9

अर्थ

इस प्रकार ‘पृथ्वी’ शब्दका व्यवहार भी मिथ्या ही है; वास्तविक नहीं है; क्योंकि यह अपने उपादानकारण सूक्ष्म परमाणुओंमें लीन हो जाती है। और जिनके मिलनेसे पृथ्वीरूप कार्यकी सिद्धि होती है, वे परमाणु अविद्यावश मनसे ही कल्पना किये हुए हैं। वास्तवमें उनकी भी सत्ता नहीं है॥ ९॥✎ 448

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #448 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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