श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.13.11

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

क्‍वचिच्च शीतातपवातवर्ष-

प्रतिक्रियां कर्तुमनीश आस्ते।

क्‍वचिन्मिथो विपणन् यच्च किञ्चिद्

विद्वेषमृच्छत्युत वित्तशाठ्यात्॥ ११

kvacicca śītātapavātavarṣa-

pratikriyāṃ kartumanīśa āste|

kvacinmitho vipaṇan yacca kiñcid

vidveṣamṛcchatyuta vittaśāṭhyāt|| 11

अर्थ

कभी शीत, घाम, आँधी और वर्षासे अपनी रक्षा करनेमें असमर्थ हो जाता है। कभी आपसमें थोड़ा-बहुत व्यापार करता है, तो धनके लोभसे दूसरोंको धोखा देकर उनसे वैर ठान लेता है॥ ११॥

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