श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.18.2

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

भद्रश्रवस ऊचुः

ॐ नमो भगवते धर्मायात्मविशोधनाय नम इति॥ २॥

oṃ namo bhagavate dharmāyātmaviśodhanāya nama iti|| 2||

अर्थ

भद्रश्रवा और उनके सेवक कहते हैं—‘चित्तको विशुद्ध करनेवाले ओंकारस्वरूप भगवान् धर्मको नमस्कार है’॥ २॥

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