श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.20.43

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

अण्डमध्यगतः सूर्यो द्यावाभूम्योर्यदन्तरम्।

सूर्याण्डगोलयोर्मध्ये कोट्यः स्युः पञ्चविंशतिः॥ ४३

aṇḍamadhyagataḥ sūryo dyāvābhūmyoryadantaram|

sūryāṇḍagolayormadhye koṭyaḥ syuḥ pañcaviṃśatiḥ|| 43

अर्थ

राजन्! स्वर्ग और पृथ्वीके बीचमें जो ब्रह्माण्डका केन्द्र है, वही सूर्यकी स्थिति है। सूर्य और ब्रह्माण्डगोलकके बीचमें सब ओरसे पच्चीस करोड़ योजनका अन्तर है ॥ ४३॥

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