श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.20.44

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

मृतेऽण्ड एष एतस्मिन् यदभूत्ततो

मार्तण्ड इति व्यपदेशः।

हिरण्यगर्भ इति यद्धिरण्याण्डसमुद्भवः॥ ४४

mṛte'ṇḍa eṣa etasmin yadabhūttato

mārtaṇḍa iti vyapadeśaḥ|

hiraṇyagarbha iti yaddhiraṇyāṇḍasamudbhavaḥ|| 44

अर्थ

सूर्य इस मृत अर्थात् मरे हुए (अचेतन) अण्डमें वैराजरूपसे विराजते हैं, इसीसे इनका नाम ‘मार्त्तण्ड’ हुआ है। ये ‘हिरण्यमय (ज्योतिर्मय) ब्रह्माण्डसे प्रकट हुए हैं, इसलिये इन्हें हिरण्यगर्भ’ भी कहते हैं॥ ४४॥

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