श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.20.45

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

सूर्येण हि विभज्यन्ते दिशः खं द्यौर्मही भिदा।

स्वर्गापवर्गौ नरका रसौकांसि च सर्वशः॥ ४५

sūryeṇa hi vibhajyante diśaḥ khaṃ dyaurmahī bhidā|

svargāpavargau narakā rasaukāṃsi ca sarvaśaḥ|| 45

अर्थ

सूर्यके द्वारा ही दिशा, आकाश, द्युलोक (अन्तरिक्षलोक), भूर्लोक, स्वर्ग और मोक्षके प्रदेश, नरक और रसातल तथा अन्य समस्त भागोंका विभाग होता है॥ ४५॥

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