॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 5.20.45
सूर्येण हि विभज्यन्ते दिशः खं द्यौर्मही भिदा।
स्वर्गापवर्गौ नरका रसौकांसि च सर्वशः॥ ४५
sūryeṇa hi vibhajyante diśaḥ khaṃ dyaurmahī bhidā|
svargāpavargau narakā rasaukāṃsi ca sarvaśaḥ|| 45
अर्थ
सूर्यके द्वारा ही दिशा, आकाश, द्युलोक (अन्तरिक्षलोक), भूर्लोक, स्वर्ग और मोक्षके प्रदेश, नरक और रसातल तथा अन्य समस्त भागोंका विभाग होता है॥ ४५॥