श्रीशुकदेवजी कहते हैं—राजन्! परिमाण और लक्षणोंके सहित इस भूमण्डलका कुल इतना ही विस्तार है, सो हमने तुम्हें बता दिया॥ १॥
एतावानेव भूवलयस्य संनिवेशः प्रमाणलक्षणतो व्याख्यातः॥ १॥
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—राजन्! परिमाण और लक्षणोंके सहित इस भूमण्डलका कुल इतना ही विस्तार है, सो हमने तुम्हें बता दिया॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.21.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 668) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/21/1/