चन्द्रमासे तीन लाख योजन ऊपर अभिजित्के सहित अट्ठाईस नक्षत्र हैं। भगवान्ने इन्हें कालचक्रमें नियुक्त कर रखा है, अतः ये मेरुको दायीं ओर रखकर घूमते रहते हैं॥ ११॥✎ 470
तत उपरिष्टात्त्रिलक्षयोजनतो नक्षत्राणि मेरुं दक्षिणेनैव कालायन ईश्वरयोजितानि सहाभिजिताष्टाविंशतिः॥ ११॥
चन्द्रमासे तीन लाख योजन ऊपर अभिजित्के सहित अट्ठाईस नक्षत्र हैं। भगवान्ने इन्हें कालचक्रमें नियुक्त कर रखा है, अतः ये मेरुको दायीं ओर रखकर घूमते रहते हैं॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.22.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 673) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/22/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)