न हि तेषां कल्याणानां प्रभवति कुतश्चन मृत्युर्विना भगवत्तेजसश्चक्रापदेशात्॥ १४॥ यस्मिन् प्रविष्टेऽसुरवधूनां प्रायः पुंसवनानि भयादेव स्रवन्ति पतन्ति च॥ १५॥
na hi teṣāṃ kalyāṇānāṃ prabhavati kutaścana mṛtyurvinā bhagavattejasaścakrāpadeśāt|| 14||
अर्थ
उन पुण्यपुरुषोंकी भगवान्के तेजरूप सुदर्शन चक्रके सिवा और किसी साधनसे मृत्यु नहीं हो सकती॥ १४॥
न हि तेषां कल्याणानां प्रभवति कुतश्चन मृत्युर्विना भगवत्तेजसश्चक्रापदेशात्॥ १४॥
उन पुण्यपुरुषोंकी भगवान्के तेजरूप सुदर्शन चक्रके सिवा और किसी साधनसे मृत्यु नहीं हो सकती॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.24.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 679) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/24/14/