श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.24.15

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

न हि तेषां कल्याणानां प्रभवति कुतश्‍चन मृत्युर्विना भगवत्तेजसश्‍चक्रापदेशात्॥ १४॥ यस्मिन् प्रविष्टेऽसुरवधूनां प्रायः पुंसवनानि भयादेव स्रवन्ति पतन्ति च॥ १५॥

yasmin praviṣṭe'suravadhūnāṃ prāyaḥ puṃsavanāni bhayādeva sravanti patanti ca|| 15||

अर्थ

सुदर्शन चक्रके तो आते ही भयके कारण असुररमणियोंका गर्भस्राव और गर्भपात* हो जाता है॥ १५॥

टिप्पणियाँ

  1. *

    ‘आचतुर्थाद्भवेत्स्रावः पातः पंचमषष्ठयोः’ अर्थात् चौथे मासतक जो गर्भ गिरता है, उसे ‘गर्भस्राव’ कहते हैं तथा पाँचवें और छठे मासमें गिरनेसे वह ‘गर्भपात’ कहलाता है।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 679)

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