पूज्यतम! हमें सबसे बड़ा वर तो आपने यही दे दिया कि ब्रह्मादि समस्त वरदायकोंमें श्रेष्ठ होकर भी आप राजर्षि नाभिकी इस यज्ञशालामें साक्षात् हमारे नेत्रोंके सामने प्रकट हो गये! अब हम और वर क्या माँगें?॥ १०॥
अथायमेव वरो ह्यर्हत्तम यर्हि बर्हिषि राजर्षेर्वरदर्षभो भवान्निजपुरुषेक्षणविषय आसीत्॥ १०॥
पूज्यतम! हमें सबसे बड़ा वर तो आपने यही दे दिया कि ब्रह्मादि समस्त वरदायकोंमें श्रेष्ठ होकर भी आप राजर्षि नाभिकी इस यज्ञशालामें साक्षात् हमारे नेत्रोंके सामने प्रकट हो गये! अब हम और वर क्या माँगें?॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.3.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 588) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/3/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)