श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.31

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

विकर्षतोऽन्तर्हृदयाद्दासीपतिमजामिलम् ।

यमप्रेष्यान् विष्णुदूता वारयामासुरोजसा॥ ३१

vikarṣato'ntarhṛdayāddāsīpatimajāmilam |

yamapreṣyān viṣṇudūtā vārayāmāsurojasā|| 31

अर्थ

उस समय यमराजके दूत दासीपति अजामिलके शरीरमेंसे उसके सूक्ष्मशरीरको खींच रहे थे। विष्णुदूतोंने उन्हें बलपूर्वक रोक दिया॥ ३१॥

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