श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.32

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

ऊचुर्निषेधितास्तांस्ते वैवस्वतपुरःसराः।

के यूयं प्रतिषेद्धारो धर्मराजस्य शासनम्॥ ३२

ūcurniṣedhitāstāṃste vaivasvatapuraḥsarāḥ|

ke yūyaṃ pratiṣeddhāro dharmarājasya śāsanam|| 32

अर्थ

उनके रोकनेपर यमराजके दूतोंने उनसे कहा—‘अरे, धर्मराजकी आज्ञाका निषेध करनेवाले तुमलोग हो कौन?॥ ३२॥

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