॥ श्रीहरिः ॥
कस्य वा कुत आयाताः कस्मादस्य निषेधथ।
किं देवा उपदेवा वा यूयं किं सिद्धसत्तमाः॥ ३३
kasya vā kuta āyātāḥ kasmādasya niṣedhatha|
kiṃ devā upadevā vā yūyaṃ kiṃ siddhasattamāḥ|| 33
अर्थ
तुम किसके दूत हो, कहाँसे आये हो और इसे ले जानेसे हमें क्यों रोक रहे हो? क्या तुमलोग कोई देवता, उपदेवता अथवा सिद्धश्रेष्ठ हो?॥ ३३॥
कस्य वा कुत आयाताः कस्मादस्य निषेधथ।
किं देवा उपदेवा वा यूयं किं सिद्धसत्तमाः॥ ३३
तुम किसके दूत हो, कहाँसे आये हो और इसे ले जानेसे हमें क्यों रोक रहे हो? क्या तुमलोग कोई देवता, उपदेवता अथवा सिद्धश्रेष्ठ हो?॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.1.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 699) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/1/33/