श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.35

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

सर्वे च नूत्नवयसः सर्वे चारुचतुर्भुजाः।

धनुर्निषङ्गासिगदाशङ्खचक्राम्बुजश्रियः॥ ३५

sarve ca nūtnavayasaḥ sarve cārucaturbhujāḥ|

dhanurniṣaṅgāsigadāśaṅkhacakrāmbujaśriyaḥ|| 35

अर्थ

सबकी नयी अवस्था है, सुन्दर-सुन्दर चार-चार भुजाएँ हैं, सभीके करकमलोंमें धनुष, तरकश, तलवार, गदा, शंख, चक्र, कमल आदि सुशोभित हैं॥ ३५॥

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