श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब यमदूतोंने इस प्रकार कहा, तब भगवान् नारायणके आज्ञाकारी पार्षदोंने हँसकर मेघके समान गम्भीर वाणीसे उनके प्रति यों कहा—॥ ३७॥
इत्युक्ते यमदूतैस्तैर्वासुदेवोक्तकारिणः।
तान् प्रत्यूचुः प्रहस्येदं मेघनिर्ह्रादया गिरा॥ ३७
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब यमदूतोंने इस प्रकार कहा, तब भगवान् नारायणके आज्ञाकारी पार्षदोंने हँसकर मेघके समान गम्भीर वाणीसे उनके प्रति यों कहा—॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.1.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 699) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/1/37/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1068 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): मेघनिर्हृदया → मेघनिर्ह्रादया