श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.64

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तामेव तोषयामास पित्र्येणार्थेन यावता।

ग्राम्यैर्मनोरमैः कामैः प्रसीदेत यथा तथा॥ ६४

tāmeva toṣayāmāsa pitryeṇārthena yāvatā|

grāmyairmanoramaiḥ kāmaiḥ prasīdeta yathā tathā|| 64

अर्थ

अजामिल सुन्दर-सुन्दर वस्त्र-आभूषण आदि वस्तुएँ, जिनसे वह प्रसन्‍न होती, ले आता। यहाँतक कि इसने अपने पिताकी सारी सम्पत्ति देकर भी उसी कुलटाको रिझाया। यह ब्राह्मण उसी प्रकारकी चेष्टा करता, जिससे वह वेश्या प्रसन्‍न हो॥ ६४॥

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