इसने अबतक अपने पापोंका कोई प्रायश्चित्त भी नहीं किया है। इसलिये अब हम इस पापीको दण्डपाणि भगवान् यमराजके पास ले जायँगे। वहाँ यह अपने पापोंका दण्ड भोगकर शुद्ध हो जायगा॥ ६८॥
तत एनं दण्डपाणेः सकाशं कृतकिल्बिषम्।
नेष्यामोऽकृतनिर्वेशं यत्र दण्डेन शुद्ध्यति॥ ६८
इसने अबतक अपने पापोंका कोई प्रायश्चित्त भी नहीं किया है। इसलिये अब हम इस पापीको दण्डपाणि भगवान् यमराजके पास ले जायँगे। वहाँ यह अपने पापोंका दण्ड भोगकर शुद्ध हो जायगा॥ ६८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.1.68 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 703) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/1/68/