जो वैवस्वत मन्वन्तर इस समय चल रहा है, इसकी पहली चतुर्युगीका त्रेतायुग अभी आरम्भ ही हुआ था। उसी समय नर्मदातटपर देवताओंका दैत्योंके साथ यह भयंकर संग्राम हुआ॥ १६॥
ततः सुराणामसुरै रणः परमदारुणः।
त्रेतामुखे नर्मदायामभवत् प्रथमे युगे॥ १६
जो वैवस्वत मन्वन्तर इस समय चल रहा है, इसकी पहली चतुर्युगीका त्रेतायुग अभी आरम्भ ही हुआ था। उसी समय नर्मदातटपर देवताओंका दैत्योंके साथ यह भयंकर संग्राम हुआ॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.10.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 755) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/10/16/