श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.10.16

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

ततः सुराणामसुरै रणः परमदारुणः।

त्रेतामुखे नर्मदायामभवत् प्रथमे युगे॥ १६

tataḥ surāṇāmasurai raṇaḥ paramadāruṇaḥ|

tretāmukhe narmadāyāmabhavat prathame yuge|| 16

अर्थ

जो वैवस्वत मन्वन्तर इस समय चल रहा है, इसकी पहली चतुर्युगीका त्रेतायुग अभी आरम्भ ही हुआ था। उसी समय नर्मदातटपर देवताओंका दैत्योंके साथ यह भयंकर संग्राम हुआ॥ १६॥

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