जब असुरोंके अस्त्र-शस्त्र समाप्त हो गये, तब वे देवताओंकी सेनापर पर्वतोंके शिखर, वृक्ष और पत्थर बरसाने लगे। परन्तु देवताओंने उन्हें पहलेकी ही भाँति काट गिराया॥ २६॥
अथ क्षीणास्त्रशस्त्रौघा गिरिशृङ्गद्रुमोपलैः।
अभ्यवर्षन् सुरबलं चिच्छिदुस्तांश्च पूर्ववत्॥ २६
जब असुरोंके अस्त्र-शस्त्र समाप्त हो गये, तब वे देवताओंकी सेनापर पर्वतोंके शिखर, वृक्ष और पत्थर बरसाने लगे। परन्तु देवताओंने उन्हें पहलेकी ही भाँति काट गिराया॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.10.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 755) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/10/26/