श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.10.25

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

न ते शस्त्रास्त्रवर्षौघा ह्यासेदुः सुरसैनिकान्।

छिन्‍नाः सिद्धपथे देवैर्लघुहस्तैः सहस्रधा॥ २५

na te śastrāstravarṣaughā hyāseduḥ surasainikān|

chinnāḥ siddhapathe devairlaghuhastaiḥ sahasradhā|| 25

अर्थ

परीक्षित्! वह शस्त्रों और अस्त्रोंकी वर्षा देवसैनिकोंको छूतक न सकी। उन्होंने अपने हस्तलाघवसे आकाशमें ही उनके हजार-हजार टुकड़े कर दिये॥ २५॥

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