श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.11.4

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

किं व उच्चरितैर्मातुर्धावद्भिः पृष्ठतो हतैः।

न हि भीतवधः श्लाघ्यो न स्वर्ग्यः शूरमानिनाम्॥ ४

kiṃ va uccaritairmāturdhāvadbhiḥ pṛṣṭhato hataiḥ|

na hi bhītavadhaḥ ślāghyo na svargyaḥ śūramāninām|| 4

अर्थ

‘क्षुद्र देवताओ! रणभूमिमें पीठ दिखानेवाले कायर असुरोंपर पीछेसे प्रहार करनेमें क्या लाभ है। ये लोग तो अपने माँ-बापके मल-मूत्र हैं। परन्तु अपनेको शूरवीर माननेवाले तुम्हारे-जैसे पुरुषोंके लिये भी तो डरपोकोंको मारना कोई प्रशंसाकी बात नहीं है और न इससे तुम्हें स्वर्ग ही मिल सकता है॥ ४॥

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