श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.12.21

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

खल्विदं महदाश्‍चर्यं यद् रजःप्रकृतेस्तव।

वासुदेवे भगवति सत्त्वात्मनि दृढा मतिः॥ २१

khalvidaṃ mahadāścaryaṃ yad rajaḥprakṛtestava|

vāsudeve bhagavati sattvātmani dṛḍhā matiḥ|| 21

अर्थ

अवश्य ही यह बड़े आश्‍चर्यकी बात है कि तुम रजोगुणी प्रकृतिके हो तो भी विशुद्ध सत्त्वस्वरूप भगवान् वासुदेवमें तुम्हारी बुद्धि दृढ़तासे लगी हुई है॥ २१॥✎ 532

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #532 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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