राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! मैं देवराज इन्द्रकी अप्रसन्नताका कारण सुनना चाहता हूँ। जब वृत्रासुरके वधसे सभी देवता सुखी हुए, तब इन्द्रको दुःख होनेका क्या कारण था?॥ ३॥
इन्द्रस्यानिर्वृतेर्हेतुं श्रोतुमिच्छामि भो मुने।
येनासन् सुखिनो देवा हरेर्दुःखं कुतोऽभवत्॥ ३
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! मैं देवराज इन्द्रकी अप्रसन्नताका कारण सुनना चाहता हूँ। जब वृत्रासुरके वधसे सभी देवता सुखी हुए, तब इन्द्रको दुःख होनेका क्या कारण था?॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.13.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 765) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/13/3/